
भोजपुरी सिनेमा जगत के नए सुपर स्टार हैं, पवन सिंह। पवन सिंह मूलत: आरा (बिहार) के रहने वाले हैं। पवन ने अपने फिल्मी कैरियर की शुरूआत ``रंगली चुनरिया तोहरे नाम से´´ की थी, वह उस समय ही एहसास करा दिया था कि वह लम्बी रेस के घोड़ा हैं। पवन ने पिछले वर्ष 2009 में अभूतपूर्व सफलता अर्जित की व लगातार सफलता के लिए निरन्तर प्रयासरत हैं। पवन की जल्द ही अशोक गुप्ता निर्मित व मिथलेश अविनाश निर्देिशत ``जब केहू दिल मे ंसमा जाला´´ प्रदशZन को तैयार है। वह इसके अलावा कई बड़े बैनरों की फिल्मों को लेकर व्यस्त हैं। पिछले दिनों फिल्म सीटी में, उनसे एक बातचीत हुई प्रस्तुत हैं उसके प्रमुख अंश:-
प्र. पिछले वर्ष 2009 में आपको मिली सफलता ने सिर्फ आपके लिए हीं नहीं, भोजपुरी सिनेमा, उद्योग के लिए भी एक कीर्तिमान बना गई। लगातार 8 हिट फिल्में ! अदभुत यह सब याद करना कैसा लगता है?
उ. यह सब याद करना काफी अच्छा लगता है, लगातार 8 हिट फिल्में चलना मेरे जैसे कम उम्र नौजवान कलाकार के लिए बहुत बड़ी बात है। यह सफलता सचमुच लॉटरी मिल जाने जैसा है। इस भारी भरकम कामयाबी का पूरा श्रेय मैं अपने परिवार, दशZकगण और माता रानी के आिशर्वाद को देता हूं।
प्र. आपको देखकर क्या यह मान लेना चाहिए कि भोजपुरी सिनेमा में झण्डा गाड़ने के लिए लोकगायिकी गांरटी जैसी है ?
उ. नहीं भोजपुरी सिनेमा में झण्डा गाड़ने के लिए लोकगायिकी कोई गांरटी जैसी नहीं है, यह अभिनय में सफलता का मूलसूत्र तो नहीं है, वरन गायकों की लोकप्रियता के माध्यम से सेफ जरूर लगता है। इसका एक कारण यह है लोकगायक पहले जनताजनार्दन द्वारा अपनाये गये होते हैं। गीत गवनई वाले कलाकार सचमुच जनता के प्यारे होते हैं।
प्र. मंच पर तो लगभग गाना छूट ही गया होगा ?
उ. नहीं ! जिन लोगों ने मुझे सरताज बनाया, मै उनको कैसे भूल सकता हूं। समय निकाल-निकाल कर मैं स्टेज शो करता रहता हूं, अब तो और मजा आता है, जब मैं अपने गानों के साथ कुछ एक डॉयलॉग्स भी दशZकों के लिए परोसता हूं। आज भी संगीत मेरा पहला प्यार है।
प्र. आपकी फिल्म ``जब केहू दिल में समा जाला´´ कि काफी चर्चा है इसके बारे में बतायें...?
उ. ``जब केहु दिल में समा जाला´´, एक म्यूजिकल लव स्टोरी है, जो मेरे दिल के काफी करीब है। निर्माता अशोक गुप्ता के इस फिल्म में मैं किसना की भूमिका में हूं, जो मुझसे काफी मिलती-जुलती है। प्रेम त्रिकोण वाले इस फिल्म मैं बांसुरी वादक हूं। रानी चटर्जी माडंल और कल्पना शाह गांव की गोरी। मिथलेश अविनाश का निर्देशन कमाल का है, वहंी विनय बिहारी के गीत व मधुकर आनन्द का संगीत विभोर कर देने वाला है।
प्र. इसके बाद और कौन-कौन सी फिल्में हैं ?
उ. इसके बाद निर्देशक राजकुमार आर. पाण्डे की दो फिल्में हैं। पहली रवि भैया के साथ `` देवरा बड़ा सतावले´´ और दूसरी ``सैंया के साथ मड़इया में´´। दोनों ही फिल्मों में मोनालिसा मेरी हिरोईन है। देवरा में भाईयों का आपसी प्रेमभाव है तो सैंया में प्रेम के लटके-झटके। देवरा का निर्माण बिहार के वितरक दिलीप जयसवाल कर रहे हैं, वहीं सैंया के निर्माता सन्दीप श्रीवास्तव।
प्र. इसके अलावा कौन-कौन सी फिल्म आ रही हैं ?
उ. इसके अलावे अनिल अग्रवाल की ``चोरवा बनल दमाद´´, संजय सिन्हा की ``गठबंधन प्यार के´´, आलोक कुमार की ``भैया की साली ओढनिया वाली´´ अभय सिन्हा व रमाकान्त प्रसाद की अनाम फिल्म, कुरूक्षेत्र, हमार माटी मे दंम बा आने वाली हैं।
प्र. सुना है सैंया के साथ....में आप घायल होते-होते बचे ?
उ. घायल होते-होते नहीं, बस यूं समझ लीजिए बचते-बचते बच गया। वरना उस ब्लास्ट में मैं भी उड़ सकता था।
प्र. सीन क्या था ?
उ. मैं भाग रहा हूं, कुछ गुण्डे तब पीछा कर रहे हैं, इसमें बम्बाडिंग होती है, बम और बारूदी सुरंग फूटने लगते हैं रियल अन्दाज में।
प्र. कैसी सफलता चाहेंगें इस वशZ ?
उ. वैसी ही सफलता चाहूंगा, जैसी ``प्रतिज्ञा´´ को मिली, जैसे आई ``तोहार नईखे कवनो जोड़, तू बेजोड़ बाडू हो, और ``ओढनिया कमाल करे´´ जैसी कमाल की सफलता। वशZ 2009 में भी यह कमाल होता रहे और दशZकों का प्यार सम्पूर्ण भोजपुरी फिल्म इण्डस्ट्री को मिले यही चाहता हूं।
You need to be a member of Bhojpuria Film News - Bhojpuri Film Samachaar to add comments!
Join Bhojpuria Film News - Bhojpuri Film Samachaar